भागवत कथा के नाम पर ‘अली मौला’ क्यों जप रहे हैं कथावाचक? Social Media पर फूटा लोगों का ग़ुस्सा

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लम्बे समय से सनातन धर्म चौतरफ़ा आक्रमणों के बीच में रहा है। पहले मुग़लों और अंग्रेजों के हमले होते थे और तलवार की नोक पर धर्मांतरण कराया जाता था। अब भी उन्हें तरह-तरह के लालच देकर और बहला-फुसलाकर हिंदू धर्म से दूर करने का काम जारी है। ऐसा लगता है कि इसकी ज़िम्मेदारी अब कुछ सम्मानित कथावाचकों ने उठाई है। पिछले कुछ समय में ऐसे कथावाचकों के ढेरों वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं जो रामकथा के नाम पर इस्लाम या ईसाईयत की शिक्षा दे रहे हैं। चूंकि इन्होंने हिंदू धर्म के कथावाचक के तौर पर बरसों से अपनी पहचान बनाई है इसलिए लोग उनकी बातों को मानते भी हैं। मशहूर राम कथावाचक मोरारी बापू तो बाकायदा राम की जगह ‘अली मौला, अली मौला’ का जाप कराते देखे जा सकते हैं। इसी तरह कई जगह भागवत कथाओं में नमाज पढ़ने के फायदे और यहां तक कि भौंडा नाच-गाना भी शुरू हो चुका है। शक जताया जा रहा है कि कथावाचकों की शक्ल में हिंदुओं के बीच बड़ी संख्या में ऐसे तत्व घुसाए गए हैं जो लोगों के बीच एक खास तरह की राय बनाने में जुटे हैं। साथ ही लड़कियों और नाचगाने का भी इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि युवाओं को खींचा जा सके।

उस मंच के आसपास जो हजारों की भीड़ होती है.  वह श्री राम , श्री कृष्ण महादेव शिव,  इंद्र , अग्नि,  वरुण जैसे देवी देवताओं की स्तुति गान सुनने के लिए आई होती है। उसमें कई माताएं ऐसी होती हैं जिन्हें इच्छा होती है कि उनका पुत्र श्री कृष्ण जैसा प्रतापी वह बुद्धिमान हो उनमें कई पत्नियां ऐसी होती है जिन्हें पति के रूप में श्री राम जैसा वर चाहिए होता है  . उस भीड़ में अनगिनत युवा ऐसे होते हैं जो खुद को अर्जुन भीम जैसे योद्धाओं के रूप में ढालना चाहते हैं और इतिहास में अमर होना चाहते हैं।

इन तमाम भावनाओं से ओतप्रोत होकर वह सभी लोग कथा के उस मंच या मंडप में पहुंचते हैं।  अपनी आंखें बंद करते हैं और एक-एक शब्द को अपनी आत्मा तक उतारते हैं। उसी भीड़ में ऐसे मां बाप भी होते हैं जो अपने बेटे को साथ इसलिए लेकर आते हैं जिससे वह श्रवण कुमार की कथा सुन सके और उनका आदर्श अपने जीवन में उतार सके। लेकिन तभी अचानक होता है एक बड़ा परिवर्तन और उन पंडालों में बजने शुरू हो जाते हैं वह गाने , वह प्रवचन जो उन्होंने सुनने तो दूर सोचे भी नहीं रहें होंगे।

मोरारीबापू के प्रवचनों में ‘सेकुलर पाठ’

रामकथाओं में इस्लाम के बारे में शिक्षा देने का यह चलन पहले मोरारी बापू ने किया। पिछले कुछ साल से वो यह काम कर रहे थे। शुरू में लोगों ने इसे बहुत गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन अब यह उनका नियमित काम बन गया है। कई बार तो वो काफी देर तक ‘अली मौला अली मौला’ पर ही अटके रहते हैं। वो कहते हैं कि यह उनके अंदर से निकलता है और अल्लाह उनसे बुलवाते हैं। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें वो ‘मुहम्मद की करुणा’ के बारे में बता रहे हैं। इसमें उन्होंने मोहम्मद साहब को दयालु और करुणावान बताते हुए एक ऐसी कहानी सुनाई जिसका ज़िक्र इस्लाम में भी नहीं मिलता है। क्या यह बात किसी से छिपी है कि देश और पूरी दुनिया में इस्लाम तलवार के दम पर फैलाया गया? जिस मज़हब के कारण हमारे देश में लाखों-करोड़ों लोगों की जान ली गई हो, उसकी करुणा की झूठी कहानी सुनाने के पीछे नीयत क्या है? मोरारी बापू मुस्लिम परिवारों को खाना खिलाने और उन्हें हज पर भेजने जैसे कामों में भी सक्रिय रहते हैं। इस बात को वो बड़े गर्व के साथ बताते भी

देवी चित्रलेखा से चिन्मयानंद बापू तक

समस्या सिर्फ़ मोरारी बापू तक नहीं है। बीते कुछ साल में ढेरों रहस्यमय कथावाचक पैदा हुए हैं, जो भागवत और राम कथा के नाम पर इस्लाम और ईसाई धर्म की शिक्षा बाँट रहे हैं। उनके प्रवचनों में जाने वाले सौ फ़ीसदी लोग हिंदू ही होते हैं तो वहाँ पर मोहम्मद साहब या ईसा मसीह की महानता के बारे में बताने या नमाज़ पढ़ने की शिक्षा देने का मतलब समझ नहीं आता। हरियाणा के पलवल की एक देवी चित्रलेखा नाम की कथावाचिका हैं, जिनके कई वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। चित्रलेखा के फ़ेसबुक पर 20 लाख से ज़्यादा फ़ॉलोअर हैं और उनके प्रवचनों में भारी भीड़ जुटती है। वो अपने प्रवचनों में जो ज्ञान देती हैं उसका असर पहली नज़र में पकड़ना आसान नहीं होगा। वो बताती हैं कि “सारे धर्म एक जैसे हैं। अगर हम मुसलमानों की नमाज़ का सम्मान कर लेंगे तो क्या हो जाएगा।” सोशल मीडिया पर कई लोगों ने यह सवाल उठाया है कि नमाज़ में जो अल्ला हू अकबर पढ़ा जाता है उसका मतलब ही यही होता है कि अल्लाह के सिवा कोई दूसरा ईश्वर नहीं है। क्या उस धर्म को बराबर कहा जा सकता है जो कहता है कि आपका ईश्वर ग़लत है और आप काफिर हैं? इसी तरह एक चिन्मयानंद बापू हैं जो “तुझको अल्ला रखे” जैसे फ़िल्मी गानों को रामकथा के मंच से सुनाते हैं।

इन नए नवेले व अद्भुत किस्म के प्रवचनों में कोई या अली रहम अली का गाना गाने लगता है तो कोई मौला मेरे मौला जैसे शब्दों का उच्चारण करने लगता है। कोई किसी मुबारक खान की कथा सुनाने लगता है तो कोई अजान नमाज आज के फायदे बताने लगता है। संतो के आगे स्वयं को पूरी तरह से समर्पित कर चुकी श्रद्धालु जनता इसका विरोध भक्ति भाव में भरी होने के चलते नहीं कर पाती और उसे यह लगता है कि मंचों से जो बोला जा रहा है शायद वह शास्त्रों ग्रंथों उपनिषदों वेदों इत्यादि में कहीं लिखा हो। लेकिन यह असल में उनकी एक बहुत बड़ी भूल होती है क्योंकि यह सब कुछ वेद, ग्रंथों उपनिषदों इत्यादि के बाहर की बातें होती है जिसका कम से कम सत्य सनातन धर्म से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं होता।

पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया मैं एक अजीब सी बहस छिड़ी हुई है जो संभवत: इससे पहले कभी नहीं उठी थी। एक बहुत बड़ा वर्ग इन तमाम बातों के विरोध में खुलकर उतर आया और इस बड़े वर्ग में कई बड़े संत , महंत , मठाधीश,  महामंडलेश्वर , आम नागरिक , हिंदू संगठन आदि के लोग शामिल है। सोशल मीडिया पर ऐसे तमाम वीडियो वायरल हो रहे हैं जिसमें विरोध के साथ में बातें दिखाई जा रही हैं कि किस प्रकार से हिंदुओं की जनसभाओं को श्री राम, श्री कृष्ण आदि के नाम पर जमा करके और उन्हें नमाज़, मज़ार, मौलवी आदि के बारे में शिक्षा व प्रेरणा दी जा रही है।

इसमें मुख्य रूप से कई कथावाचक और कथावाचक आओ के वीडियो शामिल है जिसका पक्ष और विपक्ष जल्द ही सुदर्शन न्यूज़ जनता के सामने रखने का प्रयास करेगा. सुदर्शन न्यूज़ जल्द ही इन सभी तथ्यों व क्रिया प्रतिक्रिया के विचारों को एक साथ रखकर इस मामले में किसी निष्कर्ष तक पहुंचने का प्रयास करेगा । और साथ ही जनता से यह जानना चाहेगा कि इस समुद्र मंथन रूपी विरोध के स्वर में उठे आक्रोश से वह कितना सहमत कितने संतुष्ट हैं ? व इस प्रकार के अभियान को कितना आवश्यक मानते हैं। सुदर्शन न्यूज़ भी यह सवाल करता है कि धर्म के नाम पर जमा की गई भीड़ को धर्मनिरपेक्षता की शिक्षा देना कितना उचित माना जा सकता है। जुड़े रहिए सुदर्शन न्यूज़ के साथ जिसमें आप पाएंगे अपने सभी सवालों के जवाब।

कथावाचकों का खाड़ी कनेक्शन?

दिल्ली और एनसीआर में रामकथाओं का आयोजन करने वाले एक जाने-माने व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कथावाचकों का ये सेकुलर अवतार वास्तव में खाड़ी देशों के साथ जुड़ा हुआ है। पिछले कुछ साल में बहरीन, कुवैत और यूएई जैसे देशों में उनके प्रवचन के कार्यक्रमों की संख्या बढ़ी है। ये सभी इस्लामी देश हैं और वो हिंदू धार्मिक कार्यक्रमों को इतनी आसानी से अनुमति नहीं देते। ऐसे में अगर कथावाचकों को खाड़ी देशों में आसानी से प्रोग्राम की छूट मिलती है तो यह शक पैदा करता है। आप ध्यान देंगे तो पाएँगे कि ऐसे ज़्यादातर कथावाचकों की इस्लाम के बारे में बातें एक जैसी हैं। यानी उनका कंटेंट किसी एक ही स्त्रोत से आ रहा है। हालाँकि ऊपर जिन कथावाचकों के बारे में हमने बात की है उनके बारे में हम ऐसा कोई दावा नहीं करते।

फ़ायर ब्राण्ड नेत्री साध्वी प्राची भी विरोध में उतरी

पश्चिमी यूपी से फ़ायरब्रांड नेत्री और VHP की नेता साध्वी प्राची भी विरोध में कूद पड़ी है और इसे कथा जिहाद का नाम दे डाला है और कहा है की ये सब लोग जो पवित्र व्यासपीठ पर बैठकर अली-मौला और अल्लाह को प्रणाम करने की बात करते है और सुभनल्लाह कर रहे है कोई क़व्वाली पढ़ रहा है ये सब के सब “हलाल प्रमाणित कथावाचक” हैं और यह एक प्रकार का “कथा जिहाद” है। इसी कारण से इन्हें दुबई में भी काफ़ी बुलाया जाता है क्यूँकि देश में जैसे बॉलीवुड में अरब का पैसा लगता आया है समाज को दूषित करने और इस्लामिक कल्चर को प्रमोट करने के लिए ठीक उसी तरह कथाकारों को भी अरबी पैसा मिल रहा है और इसी कारण से वो अल्लाह और मौला के भजन गा रहे है

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