1 मई से आज तक रेलवे ने चलाई 366 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें, सबसे ज्यादा आईं UP

कोरोना (कोविड-19) और देशव्यापी लॉकडाउन के कारण विभिन्न स्थानों पर फंसे लोगों को उनके गृह राज्य पहुंचाने के लिए भारतीय रेलवे अब तक 366 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चला चुका है।

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लखनऊ: कोरोना (Covid-19) और देशव्यापी लॉकडाउन के कारण विभिन्न स्थानों पर फंसे लोगों को उनके गृह राज्य पहुंचाने के लिए भारतीय रेलवे अब तक 366 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चला चुका है। इसमें सबसे अधिक 127 ट्रेनों ने उत्तर प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर अपनी यात्रा समाप्त की।

सबसे ज्यादा 127 ट्रेनें यूपी पहुंची

रेल मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक रविवार को दोपहर तीन बजे तक देश भर के विभिन्न राज्यों से कुल 366 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का परिचालन किया गया। जिसमें से 287 ट्रेनें अपने गंतव्य तक पहुंच गई जबकि 79 ट्रेनें रास्ते में हैं। इन 287 ट्रेनों में सबसे अधिक 127 रेलगाड़ियों ने उत्तर प्रदेश और 87 ने बिहार में अपनी यात्रा समाप्त की। इसके अलावा आंध्र प्रदेश (1 ट्रेन), हिमाचल प्रदेश (1 ट्रेन), झारखंड (16 ट्रेन), मध्य प्रदेश (24 ट्रेन), महाराष्ट्र (3 ट्रेनें), ओडिशा (20 ट्रेनें), राजस्थान (4 ट्रेनें), तेलंगाना (2 ट्रेनें), पश्चिम बंगाल (2 ट्रेनें) में यात्रा समाप्त की।

इन ट्रेनों ने तिरुचिरापल्ली, टिटलागढ़, बरौनी, खंडवा, जगन्नाथपुर, खुर्दा रोड, प्रयागराज, छपरा, बलिया, गया, पूर्णिया, वाराणसी, दरभंगा, गोरखपुर, लखनऊ, जौनपुर, हटिया, बस्ती, कटिहार, दानापुर और सहरसा जैसे शहरों में प्रवासियों को पहुंचाया है।

यात्रियों को मुफ्त भोजन और पानी भी दिया जा रहा

इन श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में अधिकतम 1200 यात्री सामाजिक दूरी को देखते हुए यात्रा कर सकते हैं। ट्रेन में चढ़ने से पहले यात्रियों की उचित जांच सुनिश्चित की जाती है। यात्रा के दौरान यात्रियों को मुफ्त भोजन और पानी भी दिया जा रहा है।

बता दें कि देश भर में लाकडाउन के कारण देश के विभिन्न प्रदेशों में तमाम मजदूर फंस गए थे। इन प्रवासी मजदूरों के पास धन और भोजन दोनों का अभाव हो गया था और यह अपने गृह प्रदेश में वापसी करना चाहते थे। लेकिन पूरे देश में परिवहन के सभी साधन बंद होने के कारण कई मजदूर पैदल तो कई साइकिल आदि से अपने गृह प्रदेशों की ओर कूच कर गए।

इसकी खबर मिलने पर गृह मंत्रालय के आदेश के बाद भारतीय रेलवे ने पहली मई से श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के संचालन का निर्णय लेते हुए विभिन्न स्थानों पर फंसे प्रवासी श्रमिकों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, छात्रों और अन्य व्यक्तियों को उनके गृह प्रदेश पहुंचाना शुरू किया।

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